पुरुष की प्रकृति

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नमः पार्वतीपतये हर हर महादेव

माँ के बारे में तो कई ग्रन्थ, लेख, कविताएं लिखी गयी हैं| उनकी महानता का बखान करना भी कठिन ही है| त्याग, प्रेम और वात्सल्य की प्रतीक माँ अथवा संपूर्ण स्त्री जाति की अपनत्व की कई कहानियाँ और किस्से हमने देखे हैं और पढ़े हैं| परन्तु ये छोटा सा लेख मैं उन पुरुषों को अर्पण करना चाहती हूँ जिनके त्याग और प्रेम के बारे में कोई नहीं लिखता, वे चुप चाप अपना कर्तव्य समझ के परिवार और समाज के प्रति कर्म करते रहते हैं| कभी कभी तो महिलाएं भी उनके त्याग को पूरी तरह समझ नहीं पाती| अपने परिवार की इच्छाओं को पूरा करना वो अपना कर्तव्य समझते हैं| अपनी कमाई को स्वयं पे खर्च करने से पहले बाकी सबकी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं| कितनी भी चिंता हो बहुत कम अवसर होते हैं जब वो उन्हें परिवार के सामने प्रकट करते हैं| स्वयं को बाहर से कठोर दिखाते हैं भले में मन में भावनाओं का एक ज्वार हो|

अगर एक स्त्री माँ की रूप में वात्सल्य की प्रतीक है तो पुरुष भी पिता के रूप में कर्तव्यपरायणता का प्रतीक है| समाज में दोनों का ही समान योगदान है| जिस प्रकार ‘शिव शक्ति विहीन शवः’ उसी प्रकार माँ काली के क्रोध को शांत करने के लिए शिवजी भी उनके पैर के नीचे आ गए थे| जिस समाज में महिलाओं को देवी के रूप में पूजा जाता है वहां पता नहीं ऐसा क्या चक्र चला कि महिलाओं के गौरव और पद को ठेस पहुंची लेकिन ये भी बात सच है कि एक उच्च व्यक्तित्व वाला पुरुष कभी भी किसी स्त्री का अपमान नहीं करेगा|

So my dear ladies, let us cheer for the men, the REAL men in our home or around for being there for us every time.

And I dedicate this to my PAPA on his birthday. Happy Birthday Papa. Thank you for everything you did for us, still doing and will do no matter what happens. I wish may the almighty blesses you with more power, strength and good health. May all YOUR wishes come true.